आओ एक स्वार्थी व्यक्ति की कहानी पढ़ें। Hindi Story with Moral

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Hindi Story with Moral Gold coins

एक स्वार्थी व्यक्ति

एक समय एक स्वार्थी व्यक्ति हुआ करता था। वह जो भी वस्तु देखता था तो सोचता था की वह अपनी हो जाये।वह इतना स्वार्थी था की अपना सामान जरुरत पड़ने पर भी न तो अपने किसी दोस्त को देता था और न ही किसी गरीब को।

एक दिन उस व्यक्ति के बीस स्वर्ण मुद्रा के सिक्के कहीं खो गए। तो वह खोजते खोजते अपने मित्र के घर पहुंचा और उसने उसे बताया की उसके 20 स्वर्ण मुद्रा के सिक्के कहीं खो गए है। उसका मित्र एक दयालु आदमी था।
उसी समय उसके मित्र के घर मित्र के छोटी से बेटी आयी और उसने बताया की उसके खेल के मैदान में 20 स्वर्ण मुद्रा के सिक्के मिले हैं। तो मित्र तो बेचारा सीधा साधा उसने कहा बेटी ये पैसे हमारे इस मित्र के हैं क्योंकि इन के पैसे कुछ समय पहले खो गए थे। उसने वो पैसे लेकर स्वार्थी आदमी के हाथ में थमाये। अब स्वार्थी आदमी ठहरा स्वार्थी। उसने पैसे गिने और बोला की ये पैसे तो मेरे है लेकिन ये कम हैं दरअसल मेरे 30 स्वर्ण मुद्रा सिक्के खोये थे और ये बीस ही हैं। तुम्हें मेरे बाकी 10 मुद्रा सिक्के भी देने होंगे। यह कहकर स्वार्थी व्यक्ति ने पैसे वापस कर दिए और बोला की वो कोर्ट जायेगा।

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कोर्ट में जज ने तीनों को बुलाया। स्वार्थी आदमी, उसका मित्र और उसकी बेटी। जज ने नन्ही सी लड़की से पूछा की उसके कितने स्वर्ण मुद्रा सिक्के मिले थे ? तो उसने बताया कि 20 स्वर्ण मुद्रा सिक्के। फिर जज ने स्वार्थी व्यक्ति को कटघरे में बुलाया और पूछा की तुम्हारे कितने स्वर्ण मुद्रा सिक्के खोये थे ? तो उसने बताया की 30 मुद्रा सिक्के।
तो जज ने फैसला सुनाया - क्योंकि लड़की को 20 मुद्रा सिक्के मिले हैं और इस व्यक्ति के 30 स्वर्ण मुद्रा सिक्के खोये हैं तो यह दोनों कहानी आपस में अलग दिखती है। तो ये 20 स्वर्ण मुद्रा सिक्के आप के नही है। तो ये 20 स्वर्ण मुद्रा सिक्के इस छोटी लड़की को दिए जाते हैं। अगर कोई 20 स्वर्ण मुद्रा की खोने की खबर आती है तो ये लड़की उसको दे सकती है अन्यथा ये पैसे इस छोटी लड़की के होंगे।
जज ने उस स्वार्थी व्यक्ति से कहा की यदि कोई व्यक्ति 30 स्वर्ण मुद्रा पाने की खबर यदि दर्ज कराएगा तो पुलिस उसे सूचना देगी। तो स्वार्थी व्यक्ति को एक अच्छा सबक मिला। जब उसे लगा की पैसे हाथ से जा रहे हैं तो उसने कबूल किया की साहेब मेरे 30 नहीं 20 स्वर्ण मुद्रा सिक्के ही खोये थे। परंतु जज ने उसके एक न सुनी।
इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि सत्य की हमेशा विजय होती है। झूठ की हमेशा पराजय।

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